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नेपाल में आए असमय सैलाब, जिससे जन-जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। शिशु, किशोर, युवा,प्रौढ,वृद्ध सभी आयु वर्ग के लोगों को अपनी जान पड़ी जिनमें से ज्यादातर लोग ये भी ना सके कि ये हुआ क्या......।
उससे भी बुरा उनके साथ घटित हुआ जो स्वयं तो बच गए किन्तु अपने परिजनों को देख भी ना सके। उनके मन की वेदना उसी सैलाब सी गहरी है जिसमें उनके अपने खो गये।
मुझे उस दृश्य ने झकझोर दिया जिसमें एक व्यक्ति उस उफनते पानी के इतने करीब बैठ गया था, कि पानी का उफान उस तक भी पहुंच सकता था। वह व्यक्ति भयमुक्त होकर उस भीषण बाढ़ को निहार रहा था शायद अपनों की परछाई देख रहा हो। बहुत ही भयावह, ओम् शांति।
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